15 DAYS OF LOVE||15 डेज ऑफ लव


15DAYS OF LOVE

माया आज पूरे 8साल बाद अपने मामा के घर जा रही थी। आखिरी बार जब वो 7साल की थी तब गई थी।हालांकि उसका मन नही था जाने का क्योंकि वहा कोई भी उसके उम्र का नही था।

जिसके साथ वो घूम सके या मस्ती कर सके अगर वो वहा जाति तो बस पूरा दिन घर में ही रहना पड़ता और बड़े भुजुर्गो की बातें सुनना पड़ता जो की उसे ये सब बिलकुल भी पसंद नहीं था।पर माया भी कुछ नही कर सकती थी।

उसकी मां की मां यानी उसकी नानी का तबियत कुछ ज्यादा ही सीरियस चल रहा था। जिस वजह से उसे भी जाना पड़ेगा।

माया को मामा के घर जाने से कोई प्रोब्लम नही था, बस उसे वहा कोई अच्छा साथी नहीं मिल पाएगा जिसके  साथ ओ अपना समय बिता सके,क्योंकि पूरे 15दिनो के लिए जा रही थी।

मया अभी यही सोच रही थी,की अंदर से उसकी मां आवाज देते हुए कहती है"बेटी माया मेरी नई वाली लाल रंग की बनारसी साड़ी छत पर है जरा लेकर आना तो!"

माया बेचारी आधे मन से छत पर जाति है,और रस्सी पर पसारी हुई  साड़ी उतार कर ले आति है।

माया अपने मां के पास जाकर कहती है,"मां मेरा मन नही कर रहा हैं जाने को।".........

माया की मां साड़ी बैग में रखते हुए कहती है"ऐसा नही बोलते बेटा तुझे तो पता है ना! आज कल तेरी नानी का तबियत कैसा रहता है।और नानी ने मुझसे ज्यादा तुझे याद किया है।बार बार एक ही रट लगाए जा रही है मेरी माया आ रही है ना,".........

तभी माया बीच में मुंह फूला कर कहती है,"मां वो तो ठीक है पर वहा मेरा मन नही लगता हैं।".....वहा सब कोई अपने काम में busy रहेगा फिर मैं अकेली पड़ जाऊंगी और आप भी अपनी बहनों के साथ गपसप में रहोगी।"......

माया की मां हस्ते हुए कहती है,"ऐसा कुछ नहीं हैं तू ज्यादा ही सोच रही है, अब जा जाके अपने बैग पैक कर ले।"

"पर मां?"....माया मुंह बनाते हुए कहती है पर उसकी मां उसकी एक नही सुनती है, आखिर कार माया को अपनी मां की बात माननी ही पड़ती हैं।

माया सीधे अपने कमरे में जाति है और दरवाजा जोर से बंद करती है जिससे आवाज नीचे तक जाति है।माया की मां पूछती है।"क्या हुआ माया ये आवाज कैसी थी?".....पर माया कुछ नही बोलती हैं।

माया अपने बिस्तर पर जा कर कूद कर सो जाति है,और अपना सिर तकिए से ढक लेती है। कुछ समय बाद कोई माया का नाम लेकर बाहर चिल्ला रहा होता है,"माया....माया....बेटा बाहर आओ गाड़ी आ गई है।"

ये आवाज माया के पिता की थी,माया झट से तकिए को साइड में रखती है,और बिस्तर से नीचे उतरकर दरवाज़ खोलते हुए बाहर आती है। 

माया अपने पिता के बगल में जा कर खड़ी हो जाति है,माया अभी भी आम कपड़ो में ही थी,जो ओ रोज घर में पहना करती थी,ये उसके पापा देखते है और माया से कहते है"बेटा तुम अब तक रेड्डी नही हुई?"...

माया चुपचाप गुमसुम सा चेहरा लिए वही खड़ी अपने पापा के आंखों में एक टक देखे जा रही थीं।माया की आंखे लाल पड़ गए थे जैसे मानो अब उसके आंखों से आंसु निकल आएंगे।

माया के पापा माया को पास बुलाते हुए पूछते है।"क्या हुआ तुम तैयार नहीं हुई अब तक?"....जैसे ही माया के पापा उससे ये सवाल करते है, उसके आंखों से आंसु गिरने लगते है और ओ सिसकते हुए बोलती है"पापा मुझे नही जाना"....

उसके पापा उसके आंखों से आंसू पोछते हुए प्यार से पूछते है,"अच्छा तो क्या मैं जान सकता हूं आपको मामा घर क्यों नहीं जाना है?"....

माया अपना मुंह अपने पापा के सीने से छिपा कर रोते हुए कहती है"मुझे वहा अच्छा नही लगता हैं".....माया के पापा कुछ बोलते की उससे पहले अंदर से माया की मां बोलती है!"माया जल्दी से तैयार हो जाओ गाड़ी आ चुकी है!"....

माया के पापा माया को समझाते हुए कहते है,"देखो बेटा वहा तुम्हारे उम्र के भी बच्चे होंगे, अब देखो मां गुस्सा हो जायेगी और बस 15दिन की ही तो बात है। उसके बाद मैं खुद तुम्हे लेने के लिए आऊंगा...ok"

माया थोड़े सूखे हुए आवाज़ में बोलती है"पहले promise करो की आप आओगे?"......"ठीक है, पक्का आऊंगा अब जाओ जल्दी से तैयार हो जाओ वरना मम्मी गुस्सा करेगी।"...ये कहते हुए माया के पिता माया को तैयार हाेने के लिए भेज देते है।

थोड़े ही देर में माया की मां अपनी पर्स और एक हाथ से ट्रॉली पकड़े हुए बाहर आती है,माया के पिता माया की मां के हाथ से ट्रॉली लेते हुए कहते है"लाओ ये मुझे देदो और देखो माया तैयार हुई क्या!"....माया की मां ट्रॉली माया के पिता के हाथ में पकड़ाते हुए अंदर जा कर माया को आवाज देती है"माया,, बेटी जल्दी करो "....."हां मां बस आ गई थोड़ी देर और" माया अंदर से चिल्लाते हुए कहती है।

माया हॉफ जींस टॉप पहने हुए और एक हाथ में हैंगिन बैग लिए अपने रुम से बाहर आती है।माया अपनी मां से कहती है"कैसी लग रही हू?"...माया की मां अपने आंखों का; काजल माया माथे पर लगाते हुए कहती है"हाय किसी की नजर न लगे मेरी गुड़िया को!"

और दोनो घर से निकल कर कार में जाकर बैठ जाति है।माया के पिता आगे ड्राइवर के बगल में बैठे होते है। और पीछे के सीट पर माया अपनी मां के साथ बैठी होती है।

माया अपने घर के तरफ देखती है, तभी कार स्टार्ट हो जाति है,माया अपने पिता के कहने पर जा तो रही थी ,पर उसके चेहरे के भाव से साफ ये जाहिर हो रहा था की उसका जाने का बिलकुल भी मन नही है।

To be continued 


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